IGNOU MPSE 004 Important Questions with Answer | M.A Political Science 2nd Year
भूमिका ज्योतिबा फुले के रूप में सामाजिक क्रांतिकारी
महिलाओं की स्थिति और उत्थान
- आजादी के समय भारत में महिलाओं की स्थिति बहुत खराब थी, जिसमें शिक्षा और समानता का अभाव था। जेंडर भेदभाव और सती प्रथा जैसी समस्याएँ prevalent थीं।
- ज्योतिबा फुले ने बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाई, यह बताते हुए कि लड़कियों को पढ़ने का पूरा अधिकार होना चाहिए। उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले भी इस आंदोलन का हिस्सा रहीं।
विधवा विवाह और महिला समानता
- फुले ने विधवाओं के पुनर्विवाह का समर्थन किया, यह तर्क करते हुए कि यदि पति की मृत्यु हो जाती है तो महिला को अपनी जिंदगी जीने का अधिकार होना चाहिए।
- उन्होंने पितृसत्तात्मक व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष किया, जिसमें महिलाओं को पिता की संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं होता था।
सामाजिक परिवर्तन की दिशा में योगदान
- ज्योतिबा फुले ने सती प्रथा, पर्दा प्रथा, बाल विवाह आदि जैसे सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया।
- उनके विचारों से प्रेरित होकर कई अन्य समाज सुधारकों ने भी समानता और महिला उत्थान पर काम किया।
स्वामी विवेकानंद के विचार
सामाजिक परिवर्तन पर दृष्टिकोण
- स्वामी विवेकानंद ने भी बाल विवाह और महिला सशक्तिकरण पर जोर दिया। उनके विचारों को समझाने वाले वीडियो पहले ही बनाए गए हैं।
धर्म और राजनीति
गांधीजी के विचार
- गांधीजी चाहते थे कि धर्म और राजनीति एक साथ चलें ताकि नैतिकता राजनीति में शामिल हो सके।
- हालांकि, उन्होंने देखा कि धर्म राजनीतिक भेदभाव पैदा कर सकता है, जिससे विभाजन हुआ।
जवाहरलाल नेहरू का दृष्टिकोण
- नेहरू ने धर्म और राजनीति को अलग रखने की बात कही ताकि भारत एक सेकुलर देश बन सके।
डॉ. भीमराव अंबेडकर का दृष्टिकोण
दलित समुदाय का उत्थान
- अंबेडकर दलित समुदाय के विकास पर जोर देते थे ताकि सामाजिक एवं आर्थिक लोकतंत्र मजबूत हो सके।
समाजवाद का कॉन्सेप्ट
जयप्रकाश नारायण द्वारा प्रस्तावना
- जेपी नारायण ने समाजवाद का अर्थ अमीरी और गरीबी की खाई खत्म करना बताया।
राष्ट्रवाद पर रविंद्रनाथ टैगोर की संकल्पना
स्वतंत्रता और राष्ट्रभक्ति
- टैगोर ने राष्ट्रभक्ति को अपने देश से प्रेम करने तथा उसकी एकता बनाए रखने से जोड़ा।
माणव रोय द्वारा पार्टी बिन लोकतंत्र
राजनीतिक पार्टीयों की आलोचना
- माणव रोय ने ऐसे लोकतंत्र की कल्पना की जहां राजनीतिक पार्टियाँ न हों क्योंकि वे भ्रष्टाचार फैलाती हैं।
मोहम्मद इक़बाल के विचार
राष्ट्रवाद पर चर्चा
- इक़बाल ने लोगों में राष्ट्रवादी भावना जगाने हेतु अपने विचार प्रस्तुत किए ताकि लोग अपने देश के प्रति जागरूक रहें।