Epi. 07 गुहिल - सिसोदिया वंश मेवाड़ | Rathore Rajput Dynasty Bikaner By Rajveer sir Springboard
गोहिल वंश और मेवाड़ का इतिहास
गोहिल वंश की जानकारी
- गोहिल वंश के बारे में प्राचीनतम अभिलेख सामली है, जो 646 ईस्वी का है। यह अभिलेख राजा शिलादित्य के समय का है।
- मेवाड़ को प्राचीन काल में मेद पाठ, प्राग वाट और शिवी जनपद कहा जाता था।
बापा रावल का शासन
- बापा रावल एक ऋषि हरित के शिष्य थे, जिनकी राजधानी नागदा थी।
- बापा रावल ने शिवजी (एकलिंग जी) की भक्ति की और खुद को उनके दीवान माना।
चित्तौड़ पर कब्जा
- बापा रावल ने 734 में चित्तौड़ पर कब्जा किया, मौर्य को हराकर।
- बापा रावल से पहले किसी अन्य राजा के सिक्के नहीं मिले हैं; पहली बार सोने के सिक्के उनके समय में पाए गए।
चार्ल्स मार्टेल से तुलना
- बापा रावल की तुलना फ्रांसीसी सेनापति चार्ल्स मार्टेल से की जाती है, जिन्होंने तुर्कों को हराया था।
अलट और प्रशासनिक व्यवस्था
- अलट ने आहड़ को अपनी दूसरी राजधानी बनाई और यहां प्रशासनिक अधिकारी नियुक्त किए।
- आहड़ एक व्यापारी केंद्र था, जहां पुष्कर में वरा मंदिर बनवाया गया।
हुणों का आगमन
- राजा मिहिर कुल ने बाडोली में शिव मंदिर का निर्माण करवाया।
- अलट ने हरिया देवी नामक राजकुमारी से शादी की, जो राजस्थान की पहली विदेशी बहू बनीं।
जत्री सिंह का शासनकाल
- जत्री सिंह ने दिल्ली के सुल्तान को भुताला युद्ध (1227 ई.) में हराया।
- जत्री सिंह ने चित्तौड़ को अपनी नई राजधानी बनाया।
स्वर्ण काल का उल्लेख
- दशरथ शर्मा मेवाड़ के स्वर्ण काल का उल्लेख करते हैं, जिसमें जत्री सिंह का शासन महत्वपूर्ण माना जाता है।
चित्तौड़ का इतिहास और प्रमुख घटनाएँ
अलाउद्दीन खिलजी का आक्रमण
- चित्तौड़ पर अलाउद्दीन खिलजी ने कब्जा किया और इसका नाम खिजराबाद रखा, जो उसके बेटे खिजर खा के नाम पर था।
- दबी पीर की दरगाह के अभिलेख में चित्तौड़ का नाम खिजराबाद बताया गया है।
पद्मिनी और सेनापति
- हेम रत्न सूरी ने 'गौरा बादल पद्मिनी चौपाई' लिखी, जिसमें पद्मिनी और उसके सेनापतियों गौरा और बादल का उल्लेख है।
- यह पुस्तक राजस्थानी लिपि में लिखी गई थी, जिसे मुड़िया लिपि कहा जाता है।
मेवाड़ का उद्धारक
- हमीर ने सिसोदा गांव से आकर चित्तौड़ को पुनः कब्जा किया, जिससे उसे मेवाड़ का उद्धारक माना गया।
- मोहम्मद बिन तुगलक ने सिंगोली युद्ध में हमीर को हराने की कोशिश की लेकिन वह असफल रहा।
कुंभा की प्रशंसा
- जम टोड ने हमीर को प्रबल हिंदू बताया। कुंभा ने 'रसिक प्रिया' नामक पुस्तक में वीर राजा के रूप में उनकी प्रशंसा की।
- कुंभलगढ़ प्रशस्ति में हमीर को विषम घाटी पंचानंद उपाधि दी गई थी।
लाखा का शासनकाल
- लाखा के समय जावर क्षेत्र से चांदी निकलने लगी, जिससे मेवाड़ की आर्थिक स्थिति सुधरी।
- लाखा ने राज्य त्याग कर दिया लेकिन सलुंबर ठिकाना उसे सौंप दिया गया, जहां सामंतों की शक्ति बढ़ गई।
भगत पंथ और मानगढ़ हत्याकांड
भगत पंथ का निर्माण
- भगत पंथ किस गांव में बनाया गया था, इस पर चर्चा की गई है।
- मानगढ़ हत्याकांड 17 नवंबर को हुआ था जिसमें कई लोग शहीद हुए थे।
लाखा की शादी और प्रतिज्ञा
- लाखा की शादी किससे हुई थी, यह भी उल्लेखित किया गया है।
- चुंडा ने प्रतिज्ञा की थी कि वह राजा नहीं बनेगा।
बंजारे और उनकी संस्कृति
बंजारे कौन होते हैं?
- मेघालय में लकड़ी से बनने वाले पुलों का जिक्र किया गया है।
- बंजारे घुमक्कड़ व्यापारी होते हैं जो आज भी घूमते रहते हैं।
मंदिरों और बावड़ियों का इतिहास
त्रिभुवन नारायण मंदिर
- समदे स्वर मंदिर सोलंकी शैली में बना हुआ है।
- श्रृंगी ऋषि की बावड़ी उदयपुर में स्थित है, जिसका निर्माण मोकल ने करवाया था।
अभिलेख और राजा
- श्रंगी ऋषि के अभिलेख का संबंध किस राजा से है, यह महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है।
कुंभा का शासनकाल
कुंभा का महत्व
- कुंभा एक प्रमुख राजा थे जिन्होंने अपने पिता की हत्या का बदला लिया।
पदराडा अभिलेख
- कुंभा के सबसे पुराने अभिलेख पदराडा में लिखा गया कि उन्होंने अपने पिता की हत्या का बदला लिया था।
सारंगपुर युद्ध और विजय स्तंभ
सारंगपुर युद्ध
- कुंभा ने महमूद खिलजी को सारंगपुर के युद्ध में हराया था।
विजय स्तंभ का निर्माण
- विजय स्तंभ या कीर्ति स्तंभ भगवान विष्णु को समर्पित है।
भारतीय मूर्ति कला
मूर्तियों का अजायब घर
- भारतीय मूर्ति कला का विश्वकोष "म्यूजियम ऑफ आइडल्स" कहा जाता है।
वास्तुकारों की जानकारी
- जेता पंजा पोमा नामक वास्तुकारों द्वारा निर्मित मूर्तियों के बारे में बताया गया है।
प्रतीक चिन्ह और प्रशस्ति
प्रतीक चिन्ह
- राजस्थान पुलिस और आरबीएससी के प्रतीक चिन्ह विजय स्तंभ से जुड़े हुए हैं।
प्रशस्ति लेखन
- अत्री भट्ट द्वारा लिखी गई प्रशस्तियाँ कुंभलगढ़ से संबंधित हैं।
महेश्वर और कुंभा की प्रशस्ति
कुंभा का योगदान और साहित्य
- महेश्वर प्रति प्र में एक व्यक्ति और महेश भट्ट के पिता का उल्लेख, साथ ही कीर्ति स्तंभ प्रशस्ति से कुंभा की उपलब्धियों का विवरण।
- कुंभा ने मालवा और गुजरात को एक साथ हराने का दावा किया है, यह जानकारी किस प्रशस्ति में दी गई है?
- कीर्ति स्तंभ या विजय स्तंभ के बारे में चर्चा, जिसमें अत्री भट्ट द्वारा लिखी गई उपाधियों का उल्लेख।
जैनों के योगदान
- चित्तौड़ किले में दो प्रमुख कीर्ति स्तंभों का निर्माण, जिनमें से एक आदिनाथ को समर्पित है।
- कुंभा द्वारा बनवाए गए 32 किलों का संदर्भ, श्यामल दास जी द्वारा दी गई जानकारी।
रणकपुर मंदिर
- रणकपुर मंदिर के वास्तुकार धरक का नाम और उनकी विशेषताएँ।
- चौमुखा मंदिर में 1444 पिलर हैं, इसे "स्तंभों का अजायबघर" कहा जाता है।
प्रशस्तियाँ और ऐतिहासिक तथ्य
- रणकपुर प्रशस्ति में बापा रावल और काल भोज को अलग-अलग व्यक्तियों के रूप में दर्शाया गया है।
- वास्तुकार देपा का नाम भी इस प्रशस्ति में शामिल है।
मुद्रा संबंधी जानकारी
- मुद्रा के लिए 'नानक' शब्द का उपयोग, जो आज भी पश्चिमी राजस्थान में प्रचलित है।
- नाना गांव के नाम से संबंधित चर्चा, जो मुद्रा से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है।
कुंबा की साहित्यिक रचनाएँ
- कुंबा ने संगीत पर कई महत्वपूर्ण किताबें लिखीं जैसे "सुधा प्रबंध", "कामराज रति सार", आदि।
- संगीत राज नामक पुस्तक के पांच भागों की चर्चा।
अन्य महत्वपूर्ण ग्रंथ
- गीत गोविंद पर टीका करने वाले अनूप सिंह तथा उनके योगदान पर चर्चा।
- बीकानेर स्थित अनूप संस्कृत पुस्तकालय में कुंबा की सभी किताबें रखी हुई हैं।
कुंभा और संगीत का ज्ञान
कुंभा की संगीत संबंधी जानकारी
- कुंभा केवल एक संगीतज्ञ नहीं थे, बल्कि उन्होंने कई संगीत की किताबें भी संकलित की थीं, जैसे "संगीत सुधा", "संगीत राज", और "संगीत मीमांसा"।
- कुंभा ने खुद किताबें लिखने के साथ-साथ अन्य लेखकों से भी लिखवाने का कार्य किया। उन्हें 'अभिनव भताचार्य' उपाधि दी गई थी, जो उनके संगीत ज्ञान को दर्शाती है।
विद्वानों और उनकी रचनाएँ
- कन्ह व्यास नामक विद्वान ने "एकलिंग महात्म" नामक पुस्तक लिखी, जिसमें महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक जानकारी है।
- मेहा जी ने "तीर्थ माला" नामक पुस्तक में 120 तीर्थों की जानकारी दी है।
वास्तुकला पर कुंभा का योगदान
- कुंभलगढ़ किले के वास्तुकार मंडन ने "वास्तु सार" नामक पुस्तक लिखी, जिसमें मंदिरों और शहरों के निर्माण की विधियों का वर्णन है।
- मंडन के बेटे गोविंद ने "कला निधि" नामक पुस्तक में मंदिरों के शिखर निर्माण की तकनीकों को बताया।
आयुर्वेदिक ज्ञान
- मंडन ने आयुर्वेद पर आधारित "सार समुच्चय" नामक पुस्तक भी लिखी, जो स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों को प्रस्तुत करती है।
कुंभा का ऐतिहासिक महत्व
- कुंभा को 'राणा रासो' उपाधि दी गई थी क्योंकि उन्होंने अपने दरबार में कई विद्वानों को रखा था।
- उन्होंने मालवा और गुजरात पर विजय प्राप्त कर हिंदू सुरतान कहलाए।
युद्धों में साहस
- सांगा ने कई युद्ध लड़े, जिनमें खातोली, बाड़ी, गागरोन आदि शामिल हैं। इब्राहिम लोदी को हराने वाले युद्ध में उन्हें 80 घाव लगे थे लेकिन वे फिर भी डटे रहे।
सल्तनत के राजा और युद्धों का इतिहास
इब्राहिम लोदी और उनकी पहचान
- इब्राहिम लोदी को लप्पु सा और झिंगुर सी शक्ल वाला बताया गया है, जो उनके व्यक्तित्व की एक मजेदार छवि प्रस्तुत करता है।
- चर्चा में सानिया मिर्जा का उल्लेख किया गया है, जिसमें कहा गया कि वह अकेली नहीं बल्कि चार टावरों के साथ आई थीं।
महमूद खिलजी और बाबर के युद्ध
- महमूद खिलजी ने गागरो युद्ध में इब्राहिम लोदी को हराया था, जबकि बाबर ने खानवा में सांगा को हराया।
- बाबर ने अपने सैनिकों को उत्साहित करने के लिए लड़ाई को जिहाद करार दिया, यह दर्शाते हुए कि यह धर्म की लड़ाई थी।
बाबर का शराब छोड़ने का संकल्प
- बाबर ने कसम खाई कि वह अब शराब नहीं पिएगा, क्योंकि मुसलमानों के लिए शराब पीना मना है।
- इस निर्णय से पहले लोगों ने उसकी शराब पीने की आदत पर टिप्पणी की थी।
सांगा का संघर्ष और घायल होना
- सांगा घायल हो गए थे और उनकी जगह झाला अजजा ने नेतृत्व किया।
- सांगा चंदेरी में लड़ाई के लिए जा रहे थे जब उन्हें जहर दिया गया था।
रानी कर्मावती और जोहर की कहानी
- रानी कर्मावती ने हुमायूं को राखी भेजी लेकिन सहायता नहीं मिली, जिसके बाद उन्होंने जोहर करने का निर्णय लिया।
- जोहर 1535 में हुआ था, जिसका नेतृत्व बाग सिंह द्वारा किया गया था।
उदय सिंह और उदयपुर की स्थापना
- उदय सिंह ने 1559 में उदयपुर शहर की स्थापना की।
- अकबर ने 1568 में मेवाड़ पर आक्रमण किया, जिसमें आधे लोग किले के अंदर रहकर लड़े।
कला राठौड़ और मेवाड़ का इतिहास
कला राठौड़ की वीरता
- जमल और पत्ता घायल थे, इसलिए कला राठौड़ ने उनके कंधों पर बैठकर लड़ाई लड़ी। इस कारण उन्हें "चार हाथों का देवता" कहा जाता है।
- फिल्म आर आर आर में भी इसी तरह के दृश्य हैं, लेकिन असली योद्धा जमल और कल्ला थे।
चित्तौड़ का इतिहास
- चित्तौड़ की पहली शाखा 1303 में हुई थी, राजा रतन सिंह के नेतृत्व में। दूसरी शाखा 1535 में विक्रमादित्य अडे के समय हुई।
- अकबर ने चित्तौड़ जीतने के बाद एक सिक्का चलाया था जिसे एलची कहा जाता है। उसने जमल और पत्ता की मूर्तियां आगरा किले में लगवाईं।
उदय सिंह और महाराणा प्रताप
- उदय सिंह की मृत्यु होली के दिन गोगुंदा में हुई थी। उन्होंने जगमाल को राजा बनाया, लेकिन जनता ने महाराणा प्रताप को चाहा।
- अकबर ने महाराणा प्रताप से संधि करने के लिए चार दूत भेजे, जिनमें जलाल खान और मानसिंह शामिल थे।
हल्दी घाटी युद्ध
- हल्दी घाटी का युद्ध 18 जून 1576 को हुआ था, जिसमें प्रताप और अकबर आमने-सामने आए थे।
- इस युद्ध में मानसिंह और असफ खान अकबर की ओर से सेनापति बने थे जबकि प्रताप की तरफ से सलुंबर वाले कृष्ण दास चुंडावत आए थे।
युद्ध की स्थिति
- बदायनी ने लिखा कि इस युद्ध में मेवाड़ी सेना इतनी कमजोर हो गई थी कि वे बनास नदी तक भाग गए।
- हार के बाद अकबर ने उदयपुर पर कब्जा किया और उसका नाम बदलकर मोहम्मदाबाद रख दिया।
इस प्रकार, यह नोट्स मेवाड़ के ऐतिहासिक घटनाक्रमों को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं, विशेष रूप से कला राठौड़, उदय सिंह तथा महाराणा प्रताप के संदर्भ में।
महाराणा प्रताप और अकबर की संघर्ष कथा
प्रारंभिक स्थिति
- इस भाग में बताया गया है कि महाराणा प्रताप की सेना में से 100 लोग गए थे, जिनमें से केवल 25 वापस आए। 75 लोग रास्ते में मारे गए या भूख-प्यास के कारण मर गए।
- अकबर ने एक दिन पूछा कि क्या मुगलों को महाराणा प्रताप का पता नहीं चल सकता। यह दर्शाता है कि मुगलों को महाराणा की लोकेशन खोजने में कठिनाई हो रही थी।
शाहबाज खान का अभियान
- शाहबाज खान को भेजा गया था, जिसने 1576 में सिवाना किला जीता। यह किला राठौड़ों की शरण स्थली थी।
- अकबर ने शाहबाज खान को कुंभलगढ़ पर अटैक करने का आदेश दिया, यह सोचकर कि यदि वह मारवाड़ के किलों पर कब्जा कर सकता है तो मेवाड़ पर भी कर सकता है।
कुंभलगढ़ पर आक्रमण
- शाहबाज खान ने कुंभलगढ़ पर तीन बार हमला किया लेकिन सफल नहीं हो पाया। इसके बाद वह पंजाब चला गया।
- अकबर ने सेनापति बदलते हुए अब्दुल रहीम खाने को भेजा, जो प्रेम के दोहे लिखने वाले थे।
संधि और युद्ध
- अब्दुल रहीम ने सुझाव दिया कि लड़ाइयाँ करने के बजाय संधि करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब राजाओं ने दोस्ती कर ली तो महाराणा प्रताप क्यों नहीं करना चाहते?
- अकबर ने फिर भी उन्हें लड़ाई करने का आदेश दिया और अब्दुल रहीम चुपचाप बैठे रहे।
पकड़ने का प्रयास
- अब्दुल रहीम ने पत्र लिखकर बताया कि वे महाराणा प्रताप को पकड़ने के लिए गए थे लेकिन असफल रहे।
- अकबर चिंतित था क्योंकि उसे अपने सेनापतियों से जवाब देना था कि वे क्यों पकड़ नहीं पा रहे हैं।
अमर सिंह और महिलाओं की गिरफ्तारी
- अमर सिंह, महाराणा प्रताप का बेटा, महिलाओं की आवाज सुनकर बाहर आया और देखा कि महिलाएं गिरफ्तार हो गई थीं।
- महिलाओं को रोते हुए देखकर अमर सिंह ने पूछा और उन्हें वापस लाने का प्रयास किया।
नैतिकता और महानता
- रहीम जी ने कहा कि वह नहीं जानते कब तक मुगलिया सल्तनत राज करेगी लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट किया कि नैतिक चरित्र ही किसी व्यक्ति की महानता दर्शाता है।
- महाराणा प्रताप और दुर्गादास राठौड़ जैसे लोग अपने नैतिक चरित्र के लिए जाने जाते हैं, जिन्होंने दुश्मन की महिलाओं को सम्मानपूर्वक लौटाया।
इस प्रकार, ये नोट्स न केवल घटनाओं का सारांश प्रस्तुत करते हैं बल्कि उन महत्वपूर्ण विचारों और नैतिकताओं को भी उजागर करते हैं जो इस ऐतिहासिक संघर्ष में शामिल थीं।
महाराणा प्रताप और अकबर का संघर्ष
महिलाओं के प्रति व्यवहार
- व्यक्ति की पहचान उसके महिलाओं के साथ व्यवहार से होती है। अच्छा व्यवहार करने वाले व्यक्ति को अच्छा माना जाता है, जबकि बुरा व्यवहार करने वाले को नीच समझा जाता है।
अकबर और महाराणा प्रताप
- अकबर ने एक सेनापति जगन्नाथ कछवाहा को भेजा था, लेकिन यह स्पष्ट नहीं था कि वह महाराणा प्रताप को पकड़ने में सफल हो पाएंगे या नहीं।
- 1585 के बाद, अकबर ने मेवाड़ पर कोई आक्रमण नहीं किया, जबकि उसने अन्य क्षेत्रों जैसे अफगानिस्तान और कश्मीर पर आक्रमण किए थे।
राजस्थान में स्थिति
- सिरोही जैसी छोटी रियासत ने भी अकबर की सेना को हराया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उस समय राजस्थान में मुगलों की स्थिति कितनी खराब थी।
- व्यापार बंद होने से अकबर की सेना कमजोर हुई और उसे आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ा।
चित्रकला का विकास
- महाराणा प्रताप ने चावंड में मेवाड़ की चित्रकला की शुरुआत की।
- निसार दन नामक चित्रकार उनके समय में महत्वपूर्ण था और उन्होंने उद्यान विज्ञान पर भी किताबें लिखी थीं।
युद्ध रणनीतियाँ
- सुल्तान खान नामक सेनापति ने पहाड़ों में जाने से मना किया क्योंकि वहां महाराणा प्रताप उन्हें आसानी से हरा सकता था।
- सुल्तान खान ने सप्लाई रोकने का सुझाव दिया ताकि महाराणा प्रताप को अंदर ही रोका जा सके।
अटैक योजनाएँ
- चार प्रमुख रास्तों पर थाने स्थापित किए गए ताकि सप्लाई रोकी जा सके।
- दशहरे पर हथियारों की पूजा करने के बाद युद्ध योजना बनाई गई कि कैसे बाहर निकलकर हमला किया जाए।
दिवेर का महत्व
- दिवेर क्षेत्र में मुगलों द्वारा 36000 सैनिकों का समर्पण हुआ था, जो मेवाड़ के लिए एक महत्वपूर्ण जीत थी।
महाराणा प्रताप और सुल्तान खान की कहानी
सुल्तान खान का अंत
- सुल्तान खान को अमर सिंह ने मारा, और महाराणा प्रताप घायल अवस्था में थे। यह घटना 1582 के बाद हुई थी।
- जब सुल्तान खान मरने वाले थे, उन्होंने अपनी अंतिम इच्छा बताई कि वे अपने हत्यारे को देखना चाहते हैं।
महाराणा प्रताप का साहस
- महाराणा प्रताप ने अमर सिंह को बुलाया ताकि वह सुल्तान खान को दिखा सकें।
- अमर सिंह ने गंगाजल देकर सुल्तान खान की अंतिम क्षणों में मदद की, जिससे उसकी आंखें बंद हो गईं।
युद्ध की स्थिति
- अमर सिंह ने बताया कि अगर भाला खींचा जाए तो सुल्तान खान जल्दी मर जाएगा।
- युद्ध के दौरान, अमर सिंह ने अपनी ताकत से भाले को बाहर निकाला।
मेवाड़ का संघर्ष
- मेवाड़ के थर्मोपोली नामक युद्ध में महाराणा प्रताप और उनके साथी भामाशा का उल्लेख किया गया है।
- भामाशा ने महाराणा प्रताप को धन दिया और कहा कि वे हमेशा उनके साथ रहेंगे।
चेतक और उसकी विरासत
- चेतक, महाराणा प्रताप का घोड़ा, आज भी प्रसिद्ध है; पुलिस उसे संदर्भित करती है जब कोई अपराध होता है।
- चावंड में महाराणा प्रताप की मृत्यु हुई थी, जहां उनकी छत्री बनी हुई है।
मुगलों के साथ संधि
- अमर सिंह के समय में मुगल-मेवाड़ संधि हुई थी जो जहांगीर के साथ स्थापित की गई थी।
- करण सिंह नामक राजा ने दो महल बनवाए: कण विलास और दिलखुश।
शाहजहां का विद्रोह
- खुर्रम (शाहजहां), अपने पिता जहांगीर के खिलाफ बगावत करता है।
- खुर्रम जग मंदिर में ठहरता है, जो ताजमहल बनने की प्रेरणा बना।
इस प्रकार, ये नोट्स महाराणा प्रताप और उनके समय की महत्वपूर्ण घटनाओं पर प्रकाश डालते हैं।
पंचायतन शैली और जगदीश मंदिर
पंचायतन शैली का परिचय
- पंचायतन शैली के अंतर्गत बने मंदिरों की चर्चा की गई है, जिसमें अर्जुन भाणा और मुकुंद जैसे वास्तुकार शामिल हैं।
- जगदीश मंदिर के वास्तुकार का नाम पूछा गया है, साथ ही यह भी कि इसे सपने में किसने बनाया था।
प्रशस्तियाँ और लेखन
- कृष्ण भट्ट द्वारा लिखी गई प्रशस्ति का उल्लेख किया गया है, जो जगदीश मंदिर से संबंधित है।
- कुंबलगढ़ की प्रशस्ति के लेखक अत्री भट्ट का नाम लिया गया है।
जगदीश मंदिर का सांस्कृतिक संदर्भ
- जगदीश मंदिर की सुंदरता पर चर्चा करते हुए एक फिल्म "ये जवानी है दीवानी" का उदाहरण दिया गया है, जिसमें उदयपुर में शादी का दृश्य दिखाया गया है।
- रणबीर कपूर और दीपिका पादुकोण के बीच बातचीत के दौरान दिखाई देने वाले मंदिर को पहचानने पर जोर दिया गया है।
महत्वपूर्ण प्रश्न
- यह सवाल उठाया गया कि जगदीश मंदिर किसने बनवाया था और इसके पीछे क्या कहानी छिपी हुई है।